शिक्षा बोर्ड के पूर्व निदेश्ाक पर गैंगस्टर
(Former Director , UPMSP under Gangster Act, To get bail is tough)
गैंगस्टर एक्ट में जमानत मुश्किल
उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाजविरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1986 (गैंगस्टर एक्ट) ः अगर कोई व्यक्ति एक या एक से अधिक व्यक्तियों का समूह बनाकर समाज में आर्थिक, शारीरिक क्षति करने के उद्देश्य से किसी के प्रति अपराध करता है तो वह इस अधिनियम के तहत आएगा।
गैंगस्टर एक्ट के मामले की पुलिस एक साल तक विवेचना कर सकती है। इसके तहत पुलिस एक साल के दौरान कभी भी आरोपी को रिमांड पर ले सकती है। यह व्यवस्था सिर्फ गैंगस्टर एक्ट में है। हत्या या अन्य संगीन अपराधों में पुलिस पर बाध्यता है कि वह 90 दिन में इस मामले में आरोप पत्र अथवा अन्तिम रिपोर्ट लगाए। जबकि कम संगीन अपराधों में यह बाध्यता 60 दिनों की है। इसी वजह से गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध आरोपी को जल्दी जमानत नहीं मिल पाती है।
लखनऊ। टीईटी के रिजल्ट संशोधन कर करोड़ों का वारा-न्यारा करने के आरोपी पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन और उनके नौ सहयोगियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। उधर, इनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई भी एक मार्च तक के लिए टल गई है।
रमाबाईनगर के एसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि टीईटी के रिजल्ट के नाम पर साथियों की मदद से करोड़ों का खेल करने के आरोपी माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन को गिरोह बंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) में निरुद्ध कर दिया गया है। इसके साथ ही असिस्टेंट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर नरेंद्र प्रताप सिंह, विपिन कुमार सिंह, मनीष चतुर्वेदी, माधवेंद्र सिंह, हेमंत, योगेश, अमरेंद्र प्रसाद व रमाशंकर मिश्रा पर भी गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है। तफ्तीश में खुलासा हुआ कि संजय मोहन ने गिरोह बनाकर पूरा खेल किया। संजय ही गिरोह के सरगना थे। गिरोह के अन्य लोगों के बारे में पता लगाने के साथ उनकी धरपकड़ के प्रयास जारी हैं।
News : Amar Ujala (26.2.12)
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